500 रुपये का फटा नोट और वो आखिरी बस

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"बेटा, जब जेब में फूटी कौड़ी न हो और सामने अपनों की उम्मीदें खड़ी हों, तब या तो इंसान हमेशा के लिए टूट जाता है... या फिर अपनी तकदीर खुद लिख देता है!"कहानी:रात के 11 बज रहे थे। दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे पर बारिश की बूंदे तेज़ हो चुकी थीं। 22 साल का राहुल एक टूटी हुई बेंच पर बैठा अपनी भीगी हुई जेब टटोल रहा था। जेब में सिर्फ एक 500 रुपये का नोट निकला—वह भी बीच से पूरी तरह फटा हुआ।राहुल अपने गाँव से शहर आया था एक बड़ा इंसान बनने का सपना लेकर। लेकिन पिछले