ध्रुव की तारा - भाग 23

(52)
  • 1.7k
  • 1
  • 492

ध्रुव की ताराभाग - २३लेखिका "अनामिका"​रात भर तारा की आँखों में नींद की एक बूँद तक नहीं थी। जिस इंसान को वह बचपन से चाहती आई थी, कल रात उसने अपने दिल की बात कह दी थी। यही अहसास उसके दिल को इतनी खुशी दे रहा था कि सुबह सूरज निकलने से पहले ही उसकी आँख खुल गई।​वह झटपट उठकर तैयार हुई और सीधा अपनी खिड़की के पास पहुँची। सामने ध्रुव के कमरे की खिड़की बंद थी। तारा गालों पर हाथ रखे सोचने लगी—'क्या वह सो रहा होगा? कल रात के बारे में सोचकर क्या वह भी मेरी तरह बेचैन