तीन ख़त

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(पहला ख़त - The first letter)प्रिय शालिनी,एक ही चाँद को निहारते हुए, क्या दो अजनबी लोगों के बीच कोई रिश्ता होता है?अगर नहीं, तो हमारा भी कोई रिश्ता नहीं है।फिर भी, तुम मुझे कभी अजनबी नहीं कह पाओगी।पूरी ज़िंदगी मैंने तुम्हें दूर से देखा है। ये चेहरा, ये आँखें, ये कद-काठी, ये मासूमियत।सुंदर लड़कियों में अक्सर गुरूर होता है, और कम सुंदर में लालसा। तुममें दोनों ही नहीं था।तुमने कभी खुद को तवज्जो नहीं दी और वही तुम्हारी असली ख़ूबसूरती थी। बिल्कुल वही लड़की थी तुम, जिसे माता-पिता तुरंत पसंद कर लेते हैं।मुझे आज भी याद है, जब तुम पहली