त्रिपुरोपनिषद

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त्रिपुरोपनिषद---त्रिपुरोपनिषद् का उपलब्ध पाठ १६ मुख्य मन्त्रों में है। यह ऋग्वेद से सम्बद्ध शाक्त उपनिषद् के रूप में परम्परागत रूप से सूचीबद्ध है। ॥ श्रीत्रिपुरोपनिषत् ॥मंगलाचरणत्रिपुरोपनिषद्वेद्यपारमैश्वर्यवैभवम् अखण्डानन्दसाम्राज्यं रामचन्द्रपदं भजे ॥अर्थ:मैं उस श्रीरामचन्द्र के चरणों का ध्यान करता हूँ, जिनका परम ऐश्वर्य और महिमा त्रिपुरोपनिषद् द्वारा जानने योग्य है और जो अखण्ड आनन्द के साम्राज्यस्वरूप है।शान्तिपाठॐ वाङ्मे मनसि प्रतिष्ठिता ।मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम् ।आविरावीर्म एधि ।वेदस्य म आणीस्थः ।श्रुतं मे मा प्रहासीः ।अनेनाधीतेनाहोरात्रान् संदधामि ।ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु ।अवतु माम् । अवतु वक्तारम् । अवतु वक्तारम् ।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥अर्थ:हे परमात्मन्! मेरी वाणी मन में प्रतिष्ठित हो और मेरा