Money Vs Me - Part 24

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ठाकुर साहब मुझे इस तरह देख रहे थे, जैसे मेरे भीतर तक झाँककर यह तसल्ली कर लेना चाहते हों कि मैं किसी नुकसान पहुँचाने के इरादे से वापस तो नहीं आया हूँ। लेकिन मैं अपने चेहरे के भावों को इतना सामान्य कर चुका था कि शायद उन्हें अपनी तसल्ली हो गई थी। उनके सवाल के जवाब में मैंने कल से ऑफिस की जिम्मेदारी संभालने के लिए हाँ कह दी। ठाकुर साहब मेरी तरफ एक आखिरी बार देखते हुए कमरे से बाहर निकल गए और अपनी पत्नी को अंदर आने का इशारा कर दिया। लेकिन वह कुछ देर तक वहीं कमरे