"गुप्त ख़ज़ाना" तीन नटखट दोस्तों—शिव, दिनेश और शैलेंद्र की एक मजेदार कहानी है, जो बोरियत मिटाने के लिए कस्बे के खड़ूस हलवाई 'दाऊ' को नकली खज़ाने का लालच देकर फंसाते हैं। जब दाऊ लालच में आकर गड्ढा खोदता है, तो डिब्बे से निकला नकली मेंढक और गुलाबी गुलाल उसके चेहरे पर चिपक जाता है, जिसके बाद कस्बे की गलियों में एक जबरदस्त हास्यास्पद भागमभाग शुरू होती है।