"मोहिनी, मैं तुम्हें बहुत बार समझा चुका हूँ, तुम समझती क्यों नहीं हो? तुम्हारी तबीयत भी ठीक नहीं है। पहले अमेरिका चलो, फिर वहाँ जाकर मैं तुम्हें सब कुछ बता दूँगा।" ठाकुर साहब ने नरम लहजे में माँ को समझाते हुए कहा। लेकिन माँ अब उनकी कोई बात सुनने को तैयार नहीं थीं। "नहीं, उदय! जब तक मैं अपनी माँ और अपने बेटे से नहीं मिल जाती, मैं कहीं नहीं जाऊँगी। आप हर बार मुझे कोई न कोई बहाना देकर चुप करा देते हैं। लेकिन अब और नहीं!" माँ की बात सुनकर मैं खुद को रोक नहीं पाया। "जब वह