Devil की दास्तान - 59

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(खिड़की से हल्की धूप अंदर आ रही है। कमरे में अब सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब-सी शांति फैली है। सिमरन बिस्तर के पास कुर्सी पर बैठी है, रातभर सोई नहीं। उसकी आँखें थकी हुई हैं, पर चेहरे पर अब भी उम्मीद की झलक है।)(धीरे-धीरे करन की उँगलियाँ हिलती हैं। उसका चेहरा हल्का-सा करवट लेता है। सिमरन तुरंत चौकन्नी हो जाती है।)सिमरन (धीरे से) बोली - “करन जी?... करन जी सुन सकते हो मुझे?”(करन की पलके हिलती हैं, फिर वो धीरे से आँखें खोलता है।उसकी आँखें अब भी लाल हैं, पर उनमें डर या गुस्सा नहीं — बस मासूमियत है। जैसे कोई