भाग 6 — एकांत से नए अनुभवों तकविभा अब अपने विचारों को शब्दों में ढालने लगी थी। लिखना उसे अच्छा लगता था, क्योंकि वह उन बातों को भी कागज़ पर उतार सकती थी, जिन्हें किसी के सामने कहने में उसे संकोच होता था। लेकिन अपने विचारों को लिखने के बावजूद उसके मन की सारी उलझनें समाप्त नहीं हुई थीं।धीरे-धीरे उसका जीवन एकांत की ओर बढ़ने लगा।वह पहले से अधिक शांत रहने लगी थी। न किसी से अधिक मिलना-जुलना, न अपने मन की बातें साझा करना। वह अपना अधिकतर समय अकेले बिताती और अपने ही विचारों में खोई रहती।कभी-कभी अकेले बैठकर