आईने में बदलता जीवनभाग 8 — एक अनकहा एहसासविभा के जीवन में वह समय चल रहा था, जब वह अपने ही विचारों में उलझी हुई थी। परीक्षा में असफल होने के बाद उसका उत्साह कम हो गया था। उसने लिखना लगभग छोड़ दिया था और अपने सपनों से भी जैसे दूरी बना ली थी।जिस लेखन में कभी उसे अपने मन की शांति मिलती थी, अब उसी से उसका मन दूर हो गया था। वह अपने भीतर उठने वाले प्रश्नों का सामना करने के बजाय उनसे बचने लगी थी।लेकिन जीवन कभी-कभी ऐसे मोड़ पर ले आता है, जहाँ कोई छोटी-सी घटना