रिटायरमेंट

  • 354
  • 111

रिटायरमेंटप्रताप सिंह आज अपने आंगन में उदास लेटा था।आज उसकी रिटायरमेंट की पहली सुबह थी। जिस सुबह का उसे पिछले तीस साल से इंतजार था, जब वो फाइलों के बोझ से मुक्त होगा, जब कोई बॉस का फोन नहीं होगा, जब वो देर तक सो सकेगा। पर आज जब वो सुबह आई, तो उसे कोई खुशी नहीं हो रही थी।वो चारपाई पर लेटा-लेटा बस आसमान को निहार रहा था। आंगन वही था, घर भी वही, पर कुछ खाली-खाली लग रहा था।तभी उसकी पत्नी सुशीला दो कप कॉफी का मग लेकर आई। उसने एक मग प्रताप की तरफ बढ़ाते हुए प्यार