विजया दशमी

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आश्विन महीने की उजली रात थी। पूरी सोसायटी गरबा की ताल और झिलमिलाती रोशनी से जगमगा रही थी। ढोल की थाप और खेलैयों के उल्लास के बीच माहौल में एक अनोखा उत्सव छाया हुआ था। निशा के घर में भी सब गरबा खेलने जाने की तैयारी कर रहे थे।निशा की बड़ी बहन अंजलि और उसकी माँ सुंदर चनिया-चोली पहनकर तैयार हो चुकी थीं। भाई भी अपने दोस्तों के साथ गरबा ग्राउंड की तरफ निकलने लगा था।"निशा, तू भी चलना दो मिनट के लिए! दसवीं की परीक्षा है, हम समझते हैं, लेकिन आज तो पहला नवरात्र है," बड़ी बहन ने निशा