रात के 10:00 , शेखावत हवेली को खूबसूरती से सजाया गया था। वह इस वक्त किसी सोने के महल की तरह लग रही थी। जहां हर तरफ सिर्फ धूमधाम और चहल-पहल थी। बाहर गार्डन में आतिश बाजिया हो रही थी। वही दरवाजे पर बड़ी-बड़ी लाल कलर की थालियां रखी हुई थी जो तांबे की थी और उसे पर लाल कलर का रंग डाला हुआ पानी था। जिसे आता कहते हैं। वही दरबार से कुछ एक औरत जो काफी बुजुर्ग लग रही थी। वह सिर पर दुपट्टा डालें बाहर की तरह देख रही थी।जैसे उनकी बेचैन नजरों को किसी के आने का