दृश्य वहीं से शुरू होता है...मालिक जैसे ही उस विशाल भवन के अंदर गया, उसने चारों तरफ नज़र दौड़ाई।चारों ओर गहरा अंधेरा था...मानो पूरे महल में सिर्फ़ सन्नाटा और खालीपन ही बसता हो।वह धीरे-धीरे लिफ्ट की ओर बढ़ा और उसके अंदर खड़ा हो गया।कुछ ही देर बाद लिफ्ट एक विशाल कमरे के सामने जाकर रुकी।मालिक बाहर निकला और कमरे के अंदर चला गया।वहाँ भी चारों तरफ अंधेरा ही था।उसने धीरे से स्विच ऑन किया।अचानक पूरा कमरा रोशनी से जगमगा उठा। कमरा बेहद आलीशान था।हर तरफ महँगी और खूबसूरत चीज़ें सजी हुई थीं।मालिक ने उन सब पर बस एक बेरुखी भरी