हितेश अपनी बाइक चालू करता है और राजू को पीछे बिठाकर उसके गाँव की तरफ निकल पड़ता है।रास्ते भर हितेश बेहद खुश होकर बातें कर रहा था, "यार राजू! कितना अच्छा है न... हम दोनों पास ही के गाँव के हैं और उस अनजान शहर में मिले। फिर हमारी इतनी गहरी दोस्ती हो गई, इसे सच में किस्मत ही कहते हैं! वरना शहरों में कहाँ अपने आसपास के लोग मिलते हैं। मुझे तो बहुत खुशी हो रही है भाई!"राजू बस ख़ामोशी से उसकी हाँ में हाँ मिलाता रहा। रास्ते भर उसके दिल की धड़कनें बढ़ी हुई थीं। राजू हितेश को