अध्याय 3 : वो पागल रातरात के 11 बज रहे थे।राजावत हवेली के उस बड़े से कमरे में नित्या बेड के एक कोने में सिमटी हुई बैठी थी। सामने रुद्र सोफे पर बैठा, बिना पलक झपकाए उसे ही देख रहा था।उसने अपने आदमियों को सख्त ऑर्डर दिया था - "कोई भी इस कमरे के आसपास भी नहीं आएगा।"नित्या का गला सूख रहा था, "देखो... मुझे जाने दो। मेरी माँ परेशान हो रही होगी।"रुद्र उठा। धीरे-धीरे चलता हुआ बेड के पास आया। उसने टेबल से पानी का गिलास उठाया और नित्या की तरफ बढ़ाया।"लो, पानी पियो।"नित्या ने गिलास लेने के लिए