संस्मरण मामाजी के आँगन में लगभग 40-42 साल पहले जब मैं प्रायमरी स्कूल में पढ़ता था, तब गर्मियों की छुट्टियाँ दो महीने की होती थीं। उस समय हर साल 30 अप्रैल को परीक्षा परिणाम निकलता था। तब आजकल की तरह सभी बच्चे पास नहीं होते, बल्कि कई बच्चे फेल भी हो जाते, तो कुछ को सप्लीमेंट्री मिलती थी, जिन्हें एक बार फिर से परीक्षा देने का मौका मिल जाता था।मैं पढ़ाई-लिखाई में अपने भाई-बहनों से अपेक्षाकृत कमजोर परंतु ओवरआल ठीक-ठाक ही था। पासिंग मार्क्स तो ले ही आता था। अप्रैल के दूसरे-तीसरे सप्ताह में परीक्षा खत्म होने के बाद से ही हम सभी