यह भाग तुम्हारी रामायण-व्याख्या को आगे बढ़ाता है। कथा-परंपराओं में जहाँ विवरण अलग-अलग हैं, वहाँ उन्हें एक ही निर्विवाद तथ्य नहीं माना गया है।---10.1 — रावण के अंत की संभावना और उसके चुनावतुम्हारी व्याख्या में रावण ऐसा पात्र है जिसे शायद अपने अंत का आभास होने लगा था। तुम्हारा विचार है कि वह अपने कर्मों, अपने वंश की स्थिति और युग में होने वाले परिवर्तन को समझ रहा था।यह विचार रावण के चरित्र को एक अलग दृष्टि से देखने का अवसर देता है। लेकिन यहाँ एक प्रश्न आवश्यक है: यदि किसी व्यक्ति को अपने अंत का अनुमान हो जाए,