मेरी राख: एक सफर

 सुबह उठा तो शरीर बेहद हल्का लग रहा था। सोचा शायद रात भर नींद अच्छी आई है, इसलिए ताज़ा महसूस कर रहा हूँ। उठकर खिड़की का पर्दा हटाया और बाहर भागती दुनिया के दर्शन किए। पर जब पलटकर देखा, तो मैं अपने ही बिस्तर पर मृत पड़ा था। अचंभित होकर शरीर में वापस प्रवेश करने की कोशिश की, पर असफल रहा। तभी एक झटके में समझ आया—मैं इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह चुका हूँ।मेरे सारे अधूरे काम याद आने लगे। मीटिंग्स, प्रमोशन और सेट किया हुआ टाइम-टेबल धरा का धरा रह गया। आज ही तो इंश्योरेंस एजेंट