दशहरे का मेला लगा हुआ था। पूरे बाजार में ऐसी रौनक थी जैसे दिवाली अभी से आ गई हो।जगह-जगह चाट के ठेले सजे थे, जलेबी की महक से तो पूरा वातावरण ही मीठा हो रहा था। मैदान में बच्चों के लिए नाव वाला झूला, चकरी और एक बहुत बड़ा हिंडोला लगा था, जिसमें बैठकर लोग आसमान छू रहे थे।मैदान के एक कोने में बीस फुट ऊँचा रावण का पुतला खड़ा था। वह चुपचाप पूरे मेले को निहार रहा था। अगर उसके मन की आवाज सुनाई देती तो वह यही कह रहा होता - "मेरी ही वजह से तो इतनी रौनक