बुकनी

                “कुछ चाहिए क्या?” अपने पति बलवान के पाश्र्व घाट पर बुकनी हर रात टपक लेती है….               “नहीं,” वही शब्द बलवान को अब दहला देते हैं, “कुछ नहीं चाहिए…कुछ नहीं चाहिए…”                 “कुछ चाहिए क्या?” उस रात भी बुकनी ने यही पूछा था।               “भूतनी,” बलराम चीख पड़ा था, “तुझे नींद नहीं आती क्या? मौत नहीं आती?”                “ना,” बुकनी ने सिर हिलाया था, “तू बता तुझे