औरत का मर्म

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यह खबर जंगल की आग की तरह पूरी कॉलोनी में फैल गई थी कि कमला के पैर भारी हैं।कल तक जो कमला कॉलोनी की औरतों के बीच सहानुभूति और स्नेह की पात्र बनी हुई थी, अचानक ही उनके लिए एक कुलटा औरत बन गई थी।और होती भी क्यों न? उसके पति को गुजरे अभी डेढ़ साल भी तो नहीं हुए थे।अब कॉलोनी की औरतों के बीच रोज के आपसी किस्सों की जगह “कमला पुराण” ने ले ली थी।एक औरत दूसरी से कहती—“देखिए बहनजी, इस कमला को। कैसी घाघ निकली! पति का साथ छूटा नहीं कि न जाने किसके साथ टाँका