यह कहानी है ज़ैनब और फैजान की। ज़ैनब एक छोटे और शांत शहर के मदरसे में छोटे-छोटे बच्चों को कुरआन की दीनी तालीम देती थी और साथ ही समाज सेवा व गरीबों की मदद के लिए हमेशा आगे रहती थी। उसका दिल बहुत साफ, कोमल और नेकदिल था, जो हमेशा दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने की फिक्र में रहता था। वहीं दूसरी तरफ, फैजान एक बेहद मेहनती, उसूलपसंद और संजीदा नौजवान था। वह दिनभर कड़ी मेहनत करके अपनी रोजी-रोटी कमाता था और अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा शहर के अनाथ बच्चों की देखरेख, उनकी पढ़ाई और जरूरतों को