शाम के सात बजे थे। अक्टूबर की ठंडी हवा चल रही थी और आसमान एकदम साफ था। चाँद तारों के संग अठखेलियाँ कर रहा था।छत पर पड़ी चारपाई पर लेटी पीहू तारों को निहार रही थी। उसे तारों में अलग-अलग आकृतियाँ खोजने का बहुत शौक था। कभी उसे लगता यह शेर है, कभी हिरन। खुद से ही कहानी बनाती, कुछ गुनगुनाती, और फूलों से बातें करते हुए खुद में ही मस्त रहती।पीहू इतनी मासूम थी कि अठारह साल की होने पर भी सब उसे बच्चा ही समझते थे। सजना-सँवरना उसे बिल्कुल पसंद नहीं था। हमेशा साधारण से ढीले सूट, लंबे