Devil की दास्तान - 64

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(कमरे में घना अंधेरा है। टूटी हुई मोमबत्तियाँ, खून के छींटे और सन्नाटा। अचानक करन की उंगलियाँ हल्की-हल्की हिलती हैं। उसकी सांसें भारी और गहरी हो जाती हैं। धीरे-धीरे उसकी लाल आंखें खुलती हैं — अब उनमें इंसानियत का कोई नामोनिशान नहीं।वो पूरी तरह वैंपायर बन चुका है।)(संगीत – धीमी डरावनी धुन)करन (धीरे से, गहरी आवाज़ में) बोला - सिमरन... कहाँ हो तुम...?(वो बिस्तर से उठता है, उसके होंठों पर एक भयावह मुस्कान।सिमरन, डर के मारे कोने में सिमटी खड़ी है, आँखों में आँसू भरे हैं।)सिमरन (काँपती आवाज़ में) बोली - करन… ये आप क्या बन गए हो…?कृपया… खुद पर काबू रखो…करन