भाग 11 — क्या यही प्रेम है?एकार्थ्य की बातें सुनकर विभा ने उसके सामने तो कह दिया था कि वह उसकी परिस्थितियों को समझती है और उसके निर्णय का सम्मान करती है, लेकिन उसके भीतर कुछ टूट-सा गया था।जिस व्यक्ति को उसने अपने मन में इतनी जगह दी थी, जिसके बारे में सोचकर उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी, जिसकी आवाज़ और बातें उसे अच्छी लगती थीं, उसी के जीवन में कभी कोई और भी था।यह जानकर विभा को बहुत दुख हुआ।उसके मन में बार-बार एक ही प्रश्न उठ रहा था—क्या यही प्रेम है?जिसे हम चाहें, वह किसी और