आईने में बदलता जीवन - भाग 12

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भाग 12 — एक ख़ामोश फ़ासलाएक दिन बातचीत के दौरान एकार्थ्य ने विभा से कहा—“विभा, जिस व्यक्ति से मैंने कभी प्रेम किया था, अब मैं उसे भूल चुका हूँ। वह बहुत पुरानी बात है। उस समय मैं नादान था। उस बात को बीते कई साल हो चुके हैं। अब मुझे याद भी नहीं रहता कि कभी मैंने किसी से प्रेम किया था। लेकिन अब मैं किसी से प्रेम नहीं कर पाऊँगा।”एकार्थ्य की यह बात सुनकर विभा को थोड़ी सांत्वना मिली। उसके मन को यह जानकर कुछ सुकून मिला कि एकार्थ्य अपने अतीत से आगे बढ़ चुका है। उसके मन में