लघुकथा - 1 स्वाभिमानी किसान "नमस्कार मैनेजर साहब।" मैनेजर के चैंबर में घुसते हुए रामलाल बोला। "नमस्कार, आइए-आइए, रामलाल जी। बैठिए। बताइए क्या सेवा करूँ आपकी ?" गाँव के मँझोले किसान रामलाल जी को मैनेजर साहब अच्छे से पहचानते थे। पिछले तीन साल से हर महीने की ठीक सात तारीख को ही किश्त जमा करने जो आता है। "एक जमा पर्ची दे दीजिए, किश्त जमा करनी है।'' रामलाल विनम्रतापूर्वक बोला। "अभी कुछ दिन रूक जाओ रामलाल। सरकार सभी किसानों का कर्जा माफ करने वाली है।" मैनेजर ने उसे समझाते हुए कहा। "क्या मैनेजर साहब आप भी, कैसी बात