हिम्मत के रंग लेखक: विजय शर्मा एरीगाँव के किनारे बसे छोटे-से घर में रवि अपने पिता के साथ रहता था। माँ की मृत्यु हुए कई वर्ष हो चुके थे। पिता जी एक साधारण किसान थे। खेत छोटे थे, फसलें अनिश्चित थीं, और कर्ज का बोझ हमेशा सिर पर टंगा रहता था। रवि बारह वर्ष का था जब उसने पहली बार हिम्मत का अर्थ समझा।उस दिन आकाश में काले बादल घिरे हुए थे। अचानक आँधी आई। तेज हवा ने पेड़ों को झुका दिया। रवि खेत में था। पिता जी घर पर थे। अचानक एक तेज गर्जना हुई और बिजली कड़की। खेत के