हर बार में ही क्यों ?

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भाग 1 — खुशियों से पहले का तूफ़ानलेखिका — Miss Angel---लखनऊ — सुबह के 7:30 बजे"काव्याआआआ...!"पूरे घर में एक महिला की आवाज़ गूँज उठी।"काव्या! उठ भी जा महारानी! आठ बजने वाले हैं!"कमरे के अंदर एक लड़की रजाई में मुँह छिपाए सो रही थी।बिखरे हुए बाल, तकिए के नीचे दबा मोबाइल और चेहरे पर एक प्यारी-सी मुस्कान।यह थी काव्या शर्मा।उम्र — 20 साल।स्वभाव — चुलबुली, ज़िद्दी, थोड़ी नटखट और बेहद भावुक।काव्या उन लड़कियों में से थी जो खुद परेशान होकर भी दूसरों को हँसाना जानती थीं।लेकिन उसकी एक आदत बहुत खराब थी।वह जिस इंसान को अपना मान लेती थी, उस पर