वंश और विरासत भाग :-४

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वंश और विरासतसोहराय की आहट और वंश का दीपकगाँव में सोहराय की आहट सुनाई देने लगी थी। पूरा गाँव साफ-सफाई में जुटा था। घरों की दीवारें मिट्टी से लीपी जा रही थीं। आँगन सँवारे जा रहे थे। मवेशियों के रहने की जगह साफ की जा रही थी। हर तरफ बोंगा-बुरु की पूजा की तैयारी थी।खलिहान में धान की अच्छी फसल रखी थी। इस साल मारांग बुरू की कृपा से खेत सोना उगल रहे थे।भादो मुर्मू खलिहान के किनारे खड़ा होकर अपनी फसल निहार रहा था। चेहरे पर संतोष था। लेकिन अचानक उसकी आँखों में उदासी उतर आई।उसने मन ही मन