सुनसान से गली मुहल्ले

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सुनसान से गली मुहल्ले(एक हिंदी कहानी – लगभग 2000 शब्द)लेखक: विजय शर्मा एरीप्रस्तावनाकुछ गलियाँ सिर्फ ईंट-पत्थर और दीवारों का नाम नहीं होतीं। वे साँस लेती हैं, यादें समेटती हैं और जब सुनसान हो जाती हैं तो दिल के किसी कोने में गहरी चुभन छोड़ जाती हैं। यह कहानी उसी सुनसान गली की है—जहाँ कभी हल्ला-गुल्ला था, बच्चों की किलकारियाँ थीं, चाय की दुकान पर बहसें थीं और अब सन्नाटा छाया हुआ है। यह कहानी उस सन्नाटे के बीच छिपे इंसानियत के स्वर की भी है।पहला अध्याय: पुरानी गली का जादूअमृतसर के किनारे बसे छोटे से मुहल्ले “गणेश गली” में मेरा