बारिश और पकौड़े

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नवंबर की सुबह थी। सुबह से ही रिमझिम बारिश हो रही थी। हल्की-हल्की ठंड ने पूरे घर को अपने आगोश में ले रखा था।आर्यन स्कूल से लौटा तो उसका बस्ता पूरी तरह भीगा हुआ था। उसने जूते दरवाजे पर ही उतारे और बस्ता कोने में फेंक कर सीधा रसोई की ओर भागा।"माँ... ओ माँ! आज क्या बनाया है? बहुत तेज़ भूख लगी है।"मीना रसोई में खड़ी थी। सुबह से उसने सरसों का साग और मक्के की रोटी बनाई थी। उसने प्यार से थाली लगाते हुए कहा, "आ जा बेटा, गरम-गरम साग और रोटी बनाई है, खा ले।"आर्यन ने थाली देखी