में अहिंसा को सर्वोच्च धर्म माना गया है।2. सत्यसत्य का अर्थ है यथार्थ बोलना और असत्य से बचना। जैन धर्म में सत्य को केवल वाणी की शुद्धता नहीं, बल्कि विचारों की पारदर्शिता भी माना गया है।3. अस्तेयअस्तेय का अर्थ है चोरी न करना। किसी भी वस्तु को बिना अनुमति ग्रहण न करना और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना इस व्रत का मूल भाव है।4. ब्रह्मचर्यब्रह्मचर्य का अर्थ है इंद्रियों पर संयम। यह केवल शारीरिक संयम नहीं, बल्कि मन की शुद्धता और वासनाओं पर नियंत्रण भी है।5. अपरिग्रहअपरिग्रह का अर्थ है आवश्यकता से अधिक संग्रह न करना। जैन धर्म सिखाता