दरवाज़ा खुलने के बाद ठंडी हवा का एक झोंका कमरे में दाखिल हुआ, जिससे मेज़ पर रखी मोमबत्तियाँ टिमटिमाने लगीं। राजन और गीतिका ने सावधानी से अंदर कदम रखा। कमरे के केंद्र में रखी वह पुरानी लोहे की तिजोरी किसी डरावने साए की तरह खड़ी थी। तिजोरी के चारों ओर जमी धूल और उस पर पड़े मकड़ी के जाले इस बात की गवाही दे रहे थे कि यहाँ दशकों से किसी ने कदम नहीं रखा था।गीतिका ने अपने बैग से टॉर्च निकाली और उसकी रोशनी तिजोरी पर डाली। "राजन, देखो! तिजोरी पर कोई साधारण ताला नहीं है, बल्कि इसमें एक