यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई

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                    : प्रकरण -20 :" रोशनी अगर दोबारा शादी करना चाहती है तो उसे ख़ुशी ख़ुशी बिदा कर देना. नहीं तो उसे महिला आश्रम में दाखिल करवा देना. "वह मेरी बेटी थी. हमारा रिश्ता बाप बेटी की मिशाल था. मैं तो उसे अपने साथ रखना चाहता था. सुजाता को भी उस में क़ोई दिक्कत नहीं थी. लेकिन उस की मा ने उसे भड़काया था.उस समय कंपनी ने मरजियात निवृति का एलान हुआ था. मैंने अपनी इच्छा से निवृति स्वीकार ली थी. कंपनी में सब लोग रोशनी के अतीत के बारे में