विक्री

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2087 में, सबसे महंगी चीज़ यादें थीं। और सबसे सस्ती चीज़ भी। मीरा के हाथ काँपते थे — बस थोड़े से, मुश्किल से नज़र आने वाले — जब उसने अपनी हथेली मेमवॉल्ट स्कैनर के ऊपर रखी। शीशे के काउंटर के पीछे बैठा तकनीशियन, एक उकताया हुआ लड़का जिसके नाम के टैग पर "रोहन-7" लिखा था, बिना उसकी तरफ देखे स्क्रीन पर कुछ टाइप करता रहा। "कितनी देनी हैं?" उसने पूछा। एक आम सा सवाल। जैसे कोई किराने की सूची माँग रहा हो। "सारी।" मीरा की आवाज़ बिल्कुल सपाट थी। अब रोहन-7 ने उसकी तरफ देखा।

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विक्री - 1

2087 में, सबसे महंगी चीज़ यादें थीं। और सबसे सस्ती चीज़ भी।मीरा के हाथ काँपते थे — बस थोड़े मुश्किल से नज़र आने वाले — जब उसने अपनी हथेली मेमवॉल्ट स्कैनर के ऊपर रखी। शीशे के काउंटर के पीछे बैठा तकनीशियन, एक उकताया हुआ लड़का जिसके नाम के टैग पर "रोहन-7" लिखा था, बिना उसकी तरफ देखे स्क्रीन पर कुछ टाइप करता रहा।"कितनी देनी हैं?" उसने पूछा। एक आम सा सवाल। जैसे कोई किराने की सूची माँग रहा हो।"सारी।" मीरा की आवाज़ बिल्कुल सपाट थी।अब रोहन-7 ने उसकी तरफ देखा। ...Read More

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विक्री - 2

वो नंबर सात घंटे से मीरा के हाथ पर था। स्याही थोड़ी सी फैल गई थी — जैसे वो सीधी रहना नहीं चाहती थी।मीरा विरासत क्षेत्र 4 की एक चाय की दुकान के बाहर बैठी थी। प्लास्टिक की कुर्सी। उसके सामने एक कप था जो अब ठंडा हो चुका था। उसने उसे छुआ नहीं था। उसका दिमाग कहीं और था — उस चार-शब्द के संदेश में, उस फ़ाइल नंबर में, उस बात में जो संभव ही नहीं होनी चाहिए थी।मेमवॉल्ट का तंत्र बंद था। सरकार द्वारा प्रमाणित। कोई भी खरीदी हुई याद तक नहीं पहुँच सकता था — सिर्फ ...Read More

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विक्री - 3

वो नंबर सात घंटे से मीरा के हाथ पर था। स्याही थोड़ी सी फैल गई थी — जैसे वो सीधी रहना नहीं चाहती थी।मीरा विरासत क्षेत्र 4 की एक चाय की दुकान के बाहर बैठी थी। प्लास्टिक की कुर्सी। उसके सामने एक कप था जो अब ठंडा हो चुका था। उसने उसे छुआ नहीं था। उसका दिमाग कहीं और था — उस चार-शब्द के संदेश में, उस फ़ाइल नंबर में, उस बात में जो संभव ही नहीं होनी चाहिए थी।मेमवॉल्ट का तंत्र बंद था। सरकार द्वारा प्रमाणित। कोई भी खरीदी हुई याद तक नहीं पहुँच सकता था — सिर्फ ...Read More

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विक्री - 4

सुबह होने में दो घंटे बाकी थे। मीरा ने एक भी पल नहीं सोई।अर्जुन कमरे में था — फर्श दीवार के साथ, आँखें बंद। सोया नहीं था वो भी। दोनों जानते थे। किसी ने नहीं बोला।मीरा के दिमाग में वो औरत का चेहरा था। लैब कोट। थकी हुई आँखें। और वो एक पंक्ति जो वो कह नहीं पाई थी — "और फिर—"और फिर क्या? · · ·"झंडे का मतलब क्या होता है उनके तंत्र में?" मीरा ने आखिरकार पूछा। आवाज़ धीमी थी ...Read More

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विक्री - 5

6 किलोमीटर। सीधी रेखा में। लेकिन 2087 के पुरानी दिल्ली में कोई चीज़ सीधी रेखा में नहीं थी।पहले दो विरासत क्षेत्र के अंदर थे , भीड़भाड़, शोरगुल, जाना-पहचाना। मीरा का इलाका। अर्जुन यहाँ पहली बार था शायद, लेकिन वो ऐसे चलता था जैसे नहीं था। वो हर जगह फिट हो जाता था बिना किसी जगह का हिस्सा बने , एक खूबी जो मीरा को बेचैन करती थी और उपयोगी भी लगती थी।तीन किलोमीटर पर क्षेत्र की सीमा थी , कोई भौतिक दीवार नहीं, बस होलोग्राम और शोर का अचानक गायब हो जाना। जैसे आवाज़ का स्विच बंद हो गया ...Read More

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विक्री - 6

एक पल में सब कुछ बदल जाता है। यह बात मीरा ने आज तक सिद्धांत में जानी थी। अब में समझ आई।"लैपटॉप," अर्जुन ने कहा , एक शब्द, मुश्किल से फुसफुसाहट। मीरा पहले से उठा चुकी थी। अर्जुन ने दरवाज़े की तरफ इशारा किया , बगल की दीवार के साथ एक जगह थी, मुश्किल से दिखती, एक भंडारण कोने जैसी। दोनों उसमें घुस गए। लैपटॉप बंद किया , एलईडी भी बंद हो गई।अंधेरा।कदमों की आहट आई , नपे-तुले, पेशेवर। तीन लोग। शायद चार। मीरा ने साँस रोककर गिनने की कोशिश की।· · ·वो कमरे में आए। रुके। कोई बोला ...Read More

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विक्री - 7

वो आया शाम को। जब रोशनी और अंधेरा बीच में होते हैं, वो बीच का वक्त जब विरासत क्षेत्र होलोग्राम अभी पूरी तरह चमके नहीं थे और दिन की भीड़ अभी गई नहीं थी।सही समय। जानबूझकर।मीरा और अर्जुन एक परित्यक्त किताबों की दुकान की पहली मंज़िल पर थे , अर्जुन का "सुरक्षित ठिकाना" जो दरअसल सिर्फ एक जगह थी जहाँ मालिक ने कभी ताला लगाना बंद कर दिया था। दोनों ने बदला नहीं था। व्यवस्था काम करती थी।लैपटॉप मेज़ पर था। खुला। सुविधा_स्थान फ़ाइल अभी भी पासवर्ड-संरक्षित थी। मीरा ने दो घंटे कोशिश की थी , कुछ नहीं।तभी नीचे ...Read More