उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव मेहनूपुर की मिट्टी की खुशबू कहानीकहानी की शुरुआत: मेहनूपुर की गलियांमेहनूपुर एक ऐसा गांव है जहां सूरज की पहली किरण के साथ ही हल की आवाजें गूँजने लगती हैं। वहाँ वह गरीब किसान रहता है, जिसका नाम शंकर है उसके पास जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा है, जिससे बमुश्किल घर का गुजारा होता हैरोशनी का जन्म: इसी तंगी और गरीबी के बीच 'रोशनी' का जन्म होता है। वह बचपन से ही बहुत होनहार है।
रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 1
उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव मेहनूपुर की मिट्टी की खुशबू कहानीकहानी की शुरुआत: मेहनूपुर की गलियांमेहनूपुर एक ऐसा है जहां सूरज की पहली किरण के साथ ही हल की आवाजें गूँजने लगती हैं। वहाँ वह गरीब किसान रहता है, जिसका नाम शंकर हैउसके पास जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा है, जिससे बमुश्किल घर का गुजारा होता हैरोशनी का जन्म: इसी तंगी और गरीबी के बीच 'रोशनी' का जन्म होता है। वह बचपन से ही बहुत होनहार है।सपना: जब गांव में कोई बीमार पड़ता है और इलाज के अभाव में दम तोड़ देता है, तो वह किसान अपनी ...Read More
रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 2
फिर वह पागलों की तरह कमला की ओर मुड़ा। उसने अपनी माँ का पल्लू खींचते हुए कहा, "माँ, मुझे लगी है... आपने कहा था शहर से लौटकर रोटी खिलाओगी। माँ, चुप क्यों हो? कुछ बोलो ना माँ!" जब कमला की तरफ से भी कोई जवाब नहीं मिला, तो वह सहम गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि जो माँ-बाप उसे एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ते थे, आज वो उसे इस तरह अनसुना क्यों कर रहे हैं।अंत में, वह अपनी बड़ी बहन रोशनी की ओर भागा। उसने रोशनी का कुर्ता पकड़कर उसे झकझोरा, "दीदी! ये बापू ...Read More
रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 3
अपने घर पहुंच जाती हैंघर की बेरुखी और रोशनी की तन्हाईरोशनी हाँफती हुई घर पहुँची थी, उसका शरीर कांप था और आँखों में खौफ था। उसने सोचा था कि दादी भले ही उसे पसंद न करती हों, लेकिन एक औरत होने के नाते उसकी इज़्ज़त की रक्षा ज़रूर करेंगी।उसने रोते हुए सब बताया, "दादी, वीर प्रताप सिंह की नीयत अच्छी नहीं है। उसने आज मुझ पर हाथ डालने की कोशिश की। मैं कल से उस हवेली में नहीं जाऊंगी!"दादी उमा देवी ने अपनी माला छोड़ी और अपनी धुंधली आँखों से रोशनी को घूर कर देखा। उनके चेहरे पर सहानुभूति ...Read More
रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 4
रोशनी को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके सीने में खंजर उतार दिया हो। जिस आदमी ने उसे हवस शिकार बनाना चाहा, जिसने उसे जानवर की तरह समझा, अब उसे उसी के साथ पूरी ज़िंदगी बितानी होगी? उसके डॉक्टर बनने का सपना तो जैसे उसी आग में जल गया जो दादी ने किताबों में लगाई थी।मेहूल ने अपनी दीदी का हाथ कसकर पकड़ लिया। वह 5 साल का बच्चा भी समझ रहा था कि उसकी दीदी की आँखों में मौत का साया नाच रहा है।रोशनी ज़ोर से चिल्लाई, "नहीं! ये शादी नहीं हो सकती! मुझे डॉक्टर बनना है, मुझे ...Read More
रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 5
रोशनी का हाथ जैसे ही अपनी पीठ की ओर गया, उसका दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया। उंगलियाँ सिर्फ गीले कपड़े और खालीपन से टकराईं। वह कपड़ा, जिससे उसने मेहूल को खुद से बाँधा था, बीच से बुरी तरह फटा हुआ था।वह भयानक अहसासरोशनी पागलों की तरह घूमी और अपनी पीठ को छूने लगी। "मेहूल? मेहूल!" उसकी आवाज़ गले में ही घुट कर रह गई। नदी की उफनती लहरों ने शायद उस नन्हीं जान को उससे छीन लिया था। वह चीखना चाहती थी, पर उसके फेफड़ों में भरा पानी और ठंड ने उसे बेबस कर दिया था।वह ...Read More
रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 6
औरत थी, मुझे उस जमींदार के घर काम पर भेज दिया। मुझे लगा कि मेहनत करके मैं मेहूल को पाऊँगी, पर उस ज़मींदार की नज़र गंदी थी।"ज़ुल्म और आज़ादी की छलांग"जब मैंने उसकी सच्चाई सबके सामने लाने की कोशिश की, तो उन्होंने मुझे डराया-धमकाया। और आखिर में, उन्होंने तय किया कि वे मेरी शादी उस दरिंदे वीर प्रताप से कर देंगे ताकि मेरी ज़बान हमेशा के लिए बंद हो जाए और वे हमारी ज़मीन भी हड़प लें। पर मैं अपने माता-पिता के उस डॉक्टर बनने के सपने को ऐसे मरने नहीं दे सकती थी।"रोशनी की आँखों में फिर से ...Read More
रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 7
कमरे का माहौल अभी गंभीर ही था कि तभी दरवाज़े पर फिर से चहल-पहल हुई। मुन्ना मामा की पत्नी, मामी, अपने दोनों बच्चों के साथ अंदर दाखिल हुईं। उनके चेहरे पर वही ममतामयी मुस्कान थी जो रश्मि के चेहरे पर थी।उनके साथ दो नौजवान भी थे—आदर्श और पिंकी। ये दोनों रोशनी के हमउम्र थे और जैसे ही उन्होंने रोशनी को देखा, उनकी आँखों में सहानुभूति और दोस्ती के भाव उभर आए।परिवार का विस्तारकोमल मामी ने आते ही रोशनी के पास जाकर उसका माथा चूमा। उन्होंने रश्मि की ओर देखकर कहा:"रश्मि दीदी, मुन्ना ने मुझे सब बता दिया। बेचारी बच्ची ...Read More
रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 8
शुरुआत में रोशनी को लगा कि यह उसका वहम है। उसने सोचा:"शायद मैं पढ़ाई का बहुत ज़्यादा तनाव ले हूँ।""या शायद मैं मेहूल को बहुत याद करती हूँ, इसलिए मुझे ऐसा महसूस होता है।"उसने इसे अपना मन का भ्रम मानकर टाल दिया। लेकिन यह सिलसिला एक-दो दिन नहीं, बल्कि काफी दिनों तक लगातार चलता रहा।सन्नाटे की गूँजएक रात, जब वह गहरी नींद में थी, उसे फिर वही स्पर्श महसूस हुआ। इस बार वह स्पर्श सिर्फ एक पल का नहीं था। उसे ऐसा लगा जैसे कोई उसके बिस्तर के बिल्कुल किनारे पर बैठा है और उसे एकटक देख रहा है।रोशनी ...Read More
रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 9
हवेली की दीवारों के पीछे छिपा सन्नाटा अब और भी गहरा और डरावना हो गया था। जब मुन्ना मामा आदित्य सिंघानिया ने कोना-कोना छान मारा और कोई नहीं मिला, तो स्थिति 'डर' से बदलकर 'दहशत' में तब्दील हो गई।यहाँ से कहानी में एक नया और मनोवैज्ञानिक मोड़ आता है:दृश्य: सन्नाटे की चीखमुन्ना मामा की हताशा: मुन्ना मामा अपनी रिवॉल्वर थामे बगीचे से लेकर छत तक हो आए। गार्ड्स ने पूरी बाउंड्री चेक की, लेकिन बाहर जाने का कोई रास्ता खुला नहीं था। मुन्ना मामा दहाड़े, "असंभव! अगर वह खिड़की से कूदा है, तो गया कहाँ? ज़मीन निगल गई या ...Read More
रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 10
रसोई का रहस्यकमरे में सन्नाटा इतना गहरा था कि रोशनी को अपनी ही धड़कनें किसी नगाड़े की तरह सुनाई रही थीं। बगल में सो रही रश्मि की गहरी सांसों के बीच, रोशनी की नज़रें दरवाज़े के नीचे की पतली सी झिरी (Gap) पर जमी थीं।तभी उसने देखा... दरवाज़े के बाहर एक धुंधला सा साया हिला। वह साया रुका, फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ गया।"पापा! मामी! जल्दी आइए... कोई है!"रोशनी के गले से निकली यह चीख किसी धमाके की तरह पूरी हवेली में गूँज गई। रश्मि झटके से उठी, मानों उसे किसी ने नींद से खींच लिया हो। "क्या हुआ रोशनी? ...Read More
रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 11
मुन्ना मामा ने आदित्य के चेहरे पर छाई उलझन को पढ़ लिया। उन्होंने रिवॉल्वर का रुख स्टोर रूम की रखते हुए दबी आवाज़ में कहा:"जीजाजी, याद करने की कोशिश कीजिए! कभी-कभी हम अनजाने में भी किसी का रास्ता काट देते हैं। व्यापार की दुनिया में हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती। क्या कोई ऐसा था जिसकी दुकान आपके आने से बंद हो गई? या कोई ऐसा कर्मचारी जिसे आपने अनुशासन के नाम पर निकाला हो और वह नफरत की आग में जल रहा हो?"रश्मि की बदहवासी और नया खुलासारश्मि की हालत बिगड़ती जा रही थी। वह बार-बार उस लाल ...Read More
रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 12
आदित्य की खुशी का ठिकाना नहीं था। बरसों पुराना यार, जिसने जवानी के दिनों में कंधे से कंधा मिलाकर दिया था, वह वापस आ रहा था। रात भर के खौफनाक मंजर के बाद, मोहन जोगी के आने की खबर किसी ठंडी फुहार की तरह आई थी।सुबह की पहली किरण के साथ ही आदित्य ने पूरे घर को सजाने का हुक्म दे दिया। रश्मि के चेहरे पर भी दिनों बाद मुस्कान लौटी थी। रसोई में पकवानों की खुशबू महकने लगी और रात की वह दहशत, वह मिट्टी के निशान और वह डरावना खत... जैसे सब एक धुंधली याद बनकर पीछे ...Read More
रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 13
हवेली में अब एक अजीब सी शांति थी, लेकिन यह शांति कल रात जैसी डरावनी नहीं थी, बल्कि एक दोस्त के मिलन की सुखद यादों से भरी थी।मोहन के जाने के बाद हवेली में जैसे खुशियों की एक नई लहर दौड़ गई थी। मोहन की बातों और आदित्य की उस पुरानी कहानी ने सबके दिलों से डर का बोझ उतार दिया था। रश्मि और कोमल मामी रसोई के कामों में जुट गईं, मुन्ना मामा अपनी रिवॉल्वर साफ करके निश्चिंत होकर आराम करने लगे और आदित्य अपने बिजनेस के कुछ रुके हुए कामों में व्यस्त हो गए।धीरे-धीरे सूरज ढल गया ...Read More
रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 14
हवेली में अब एक अजीब सी शांति थी, लेकिन यह शांति कल रात जैसी डरावनी नहीं थी, बल्कि एक दोस्त के मिलन की सुखद यादों से भरी थी।मोहन के जाने के बाद हवेली में जैसे खुशियों की एक नई लहर दौड़ गई थी। मोहन की बातों और आदित्य की उस पुरानी कहानी ने सबके दिलों से डर का बोझ उतार दिया था। रश्मि और कोमल मामी रसोई के कामों में जुट गईं, मुन्ना मामा अपनी रिवॉल्वर साफ करके निश्चिंत होकर आराम करने लगे और आदित्य अपने बिजनेस के कुछ रुके हुए कामों में व्यस्त हो गए।धीरे-धीरे सूरज ढल गया ...Read More