कलावती हॉस्पिटल के लेबर रूम में प्रसव पीड़ा को चुपचाप सहन कर रही थी रेशमा… ना कोई चीख, ना चित्कार… बस चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। पीला पड़ा चेहरा और सफेद होती आँखें किसी और ही दर्द की गवाही दे रही थीं — यह दर्द केवल प्रसव का नहीं था, यह उस तकलीफ़ का था जो शायद खुदा ने उसकी किस्मत में लिख दी थी। रेशमा की कोख से चौथा बेटा जन्मा। वह भी अपनी माँ की तरह बिल्कुल शांत था। फर्क बस इतना था कि माँ के सीने में अभी धड़कन बाकी थी, और उस नवजात के भीतर… कुछ भी नहीं। उसके पहले तीनों बच्चों की तरह यह बच्चा भी मृत पैदा हुआ था।
कर्मजली कोख... - 1
कलावती हॉस्पिटल के लेबर रूम में प्रसव पीड़ा को चुपचाप सहन कर रही थी रेशमा…ना कोई चीख, ना चित्कार…बस पर एक अजीब सी शांति थी।पीला पड़ा चेहरा और सफेद होती आँखें किसी और ही दर्द की गवाही दे रही थीं —यह दर्द केवल प्रसव का नहीं था,यह उस तकलीफ़ का था जो शायद खुदा ने उसकी किस्मत में लिख दी थी।रेशमा की कोख से चौथा बेटा जन्मा।वह भी अपनी माँ की तरह बिल्कुल शांत था।फर्क बस इतना था कि माँ के सीने में अभी धड़कन बाकी थी,और उस नवजात के भीतर… कुछ भी नहीं।उसके पहले तीनों बच्चों की तरहयह ...Read More
कर्मजली कोख... - 2
डॉक्टर भारी कदमों से अपने केबिन में आकर कुर्सी पर बैठ गई।आँखों में अब भी रेशमा की चीखें तैर थीं।उन्होंने गहरी सांस ली और सामने खड़े वार्ड बॉय से कहा —“रेशमा के पति आसिफ को बुला लाओ…डिस्चार्ज फॉर्म पर साइन करने हैं।उसे घर ले जाना होगा।”वार्ड बॉय चुपचाप बाहर चला गया।करीब दस मिनट बादवह वापस लौटा।लेकिन इस बार उसके चेहरे पर अजीब सी घबराहट थी।“मैडम…” उसने हिचकिचाते हुए कहा,“बाहर… रेशमा के घर से कोई भी नहीं है।”डॉक्टर ने चौंककर सिर उठाया —“क्या मतलब?”“मैडम… उसका पति, सास, नंद…सब चले गए।”एक पल के लिए डॉक्टर को लगाशायद उसने गलत सुना है।“व्हाट ...Read More
कर्मजली कोख... - 3
पिता न बन पाने का दर्दउसके भीतर के पति पर भारी पड़ चुका था।आसिफ ने धीमी मगर ठंडी आवाज़ पुलिस से कहा —“आप लोग जाइए…यह हमारा घर का मामला है।”इतने में दरवाज़े पर हलचल हुई।सबकी नज़र एक साथ उधर मुड़ गई।दरवाज़े पर रेशमा खड़ी थी।कमज़ोर… पीली…मानो शरीर में अब जान का एक कतरा भी बाकी ना हो।अस्पताल के कपड़ों के ऊपर एक फीकी सी चादर डली थी।उसकी बाँहों में सफेद कपड़े में लिपटाउसका मृत बच्चा था…जिसे वह अब भी ऐसे पकड़े हुई थीजैसे कोई उससे फिर छीन न ले।उसके लड़खड़ाते शरीर कोउसकी सौतेली छोटी बहन साजिया संभाले हुए थी।पीछे ...Read More
कर्मजली कोख... - 4
सास ने अपनी सूखी, कठोर आँखें उठाकरसीधे साजिया की तरफ देखा।कमरे की हवा अचानक और भारी हो गई।“अगर रेशमा इस घर में रहना है…”वह धीमी मगर पत्थर जैसी आवाज़ में बोली,“तो हमारे बेटे का निकाहतुम्हारी छोटी बेटी साजिया से होगा।”साजिया का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया।“वंश तो बढ़ाना ही पड़ेगा,”सास ने बिना रुके कहा,“घर का चिराग चाहिए हमें।रेशमा नहीं दे सकती…तो उसकी बहन देगी।”रेशमा के अब्बू अवाक खड़े रह गए।सौतेली माँ ने घबराकर साजिया का हाथ पकड़ लिया।“और अगर यह मंजूर नहीं…”सास ने दरवाज़े की तरफ इशारा किया,“तो अभी इसी वक्त सब इस घर से निकल जाओ।हमारा बेटा अपनी ...Read More
कर्मजली कोख... - 5 (अंतिम भाग)
आज घर में अफरा-तफरी का माहौल था।साजिया के फैसले से कोई खुश नहीं था।सास नाराज़ थी, नंद ताने दे थी,और आसिफ बेचैन होकर बार-बार एक ही बात पूछ रहा था —“तुम पागल हो गई हो क्या?”लेकिन इस बारसाजिया का फैसला अडिग था।वह धीरे-धीरे कदम बढ़ाती हुईअपने हाथों में बच्चे को संभालेरेशमा के कमरे की तरफ बढ़ने लगी।कमरे के अंदररेशमा अपने फर वाले गुड्डे को थपकियाँ देकर सुला रही थी।कोई और औरत होतीतो शायद अब तक मर चुकी होती,लेकिन रेशमा तो जैसेमरना-जीना दोनों भूल चुकी थी।“आपा…”साजिया ने धीमे से आवाज़ लगाई।“श्श्श…”रेशमा फुसफुसाई,“मेरा बेटा सो रहा है…थोड़ी देर बाद आना…”साजिया की ...Read More