आज मृदुला कुछ अलग ही अंदाज़ में सजी हुई थी। गहरे हरे रंग की सिल्क की साड़ी, माथे पर लाल बिंदिया और जूड़े में लगे सफेद मोगरे के फूल—सब मिलकर उसके भीतर उमड़ते रोमांच को प्रकट कर रहे थे। लगभग एक साल बाद अभिनव घर लौट रहा था।विवाह के दस दिन के भीतर ही अभिनव अपनी पोस्टिंग पर चला गया था। मेहमानों और रीति-रिवाजों के बीच समय ऐसे निकल गया कि इन दोनों के शर्म के बोल भी न खुल पाए थे। आज मृदुला की आँखों में एक अनकही-सी बेचैनी थी…
Full Novel
ख़ाकी बिंदिया - भाग 1
आज मृदुला कुछ अलग ही अंदाज़ में सजी हुई थी। गहरे हरे रंग की सिल्क की साड़ी, माथे पर बिंदिया और जूड़े में लगे सफेद मोगरे के फूल—सब मिलकर उसके भीतर उमड़ते रोमांच को प्रकट कर रहे थे। लगभग एक साल बाद अभिनव घर लौट रहा था।विवाह के दस दिन के भीतर ही अभिनव अपनी पोस्टिंग पर चला गया था। मेहमानों और रीति-रिवाजों के बीच समय ऐसे निकल गया कि इन दोनों के शर्म के बोल भी न खुल पाए थे। आज मृदुला की आँखों में एक अनकही-सी बेचैनी थी…सभी ड्राइंग रूम में बैठे बार-बार दरवाज़े की ओर देख ...Read More
ख़ाकी बिंदिया - भाग 2
नया शहर… नया घर… नई दिनचर्या…ज़रूरत का सामान जुटाना, नए लोगों से परिचय और छुट्टियों में आसपास की पहाड़ियों घूमना—इन्हीं सबके बीच शुरुआती कुछ महीने कब बीत गए, उन्हें पता ही नहीं चला।धीरे-धीरे जीवन अपनी सामान्य गति से चलने लगा।मृदुला घर सँवारने के लिए कुछ न कुछ नया करती रहती। दूसरी ओर अभिनव अपने काम के साथ-साथ पदोन्नति की परीक्षा की तैयारी में जुट गया था। रात को वह पढ़ने बैठता तो मृदुला भी उसके पास आ बैठती। कभी कोई पत्रिका पढ़ती, तो कभी उनमें से अपने पसंदीदा लेख काटकर बड़ी सहेजकर अपनी स्क्रैप बुक में चिपकाती रहती।जिस दिन ...Read More
ख़ाकी बिंदिया - भाग 3
अगली सुबह मृदुला ने अभिनव से छुट्टी की अर्ज़ी के बारे में पूछा। अभिनव कुछ खोया-खोया-सा था, मानो उसने बात सुनी ही न हो। बिना कोई उत्तर दिए वह बाहर निकल गया।मृदुला भी समाचारों में बॉर्डर पर बढ़ते तनाव की ख़बरें देख रही थी। उसे भी अंदेशा हो रहा था कि हालात जल्द ही बदलने वाले हैं।कुछ ही दिनों बाद वॉर मोबिलाइज़ेशन शुरू हो गया।अभिनव ने मृदुला को परिस्थितियों की गंभीरता समझाई।दोनों ने ज़रूरत का सामान छोड़कर बाकी सामान पैक कर लिया।अभिनव को अड़तालीस घंटों के भीतर यूनिट में उपस्थित होने का आदेश मिला। उसने पापा को फ़ोन करके ...Read More