"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है या मेरे क़दम किसी छलावे में फंस गए है जिसकी वजह से हम फर्क नहीं कर पा रहे है दोनों में?" अपने कमरे की खिड़की पर खड़ी वो धूप की शिद्दत की वजह से बाहर के मुरझाए फूलो को देख रही थी, वो फूल जो माली की सुबह शाम की देखभाल की वजह से इतने ख़ुबसुरत खिलते हैं।
DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 1 Scene 1
"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है या मेरे क़दम किसी छलावे में फंस गए है जिसकी वजह से हम फर्क नहीं कर पा रहे है दोनों में?" अपने कमरे की खिड़की पर खड़ी वो धूप की शिद्दत की वजह से बाहर के मुरझाए फूलो को देख रही थी, वो फूल जो माली की सुबह शाम की देखभाल की वजह से इतने ख़ुबसुरत खिलते हैं।"हमने जो किया बिलकुल सही किया, हमें कोई ...Read More
DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 1 Scene 2
SCENE 2."........ तुम बाग़ीचे में उसके साथ क्या कर रही थी?............क्या तुमने जानबूझ के ऐसा किया......" उसे वजदान की सुनाई दी उसके बाद बाबाजान और अम्मीजान की".........मैं उन्हें समझाती रही की बेटी को इतना शेर न करें, उनके जाते ही उनकी तरबियतों को भूल गई है ये.......""........मेरी बेटी शेरनी है, इसे किसका खौफ़.............जब मैं कहता हूं बेगम तो आप मुझे टोकती है अब यही बात आप कह रही है.............मैं तो हक़ीक़त को क़ुबूल कर रही हूं.....""बाबाजान आपने और अम्मीजान ने मिलकर हमें हिम्मती और मज़बूत बनाया था ना....अम्मीजान ऐसी तो नहीं थीं, अब उन्हें क्या हो गया है? वो ...Read More
DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 1 Scene 3
"अम्मी जान भाई जान को पता नहीं क्या हो गया है बहुत गुस्से में है, जल्दी आपको बुला रहे माहम ने परेशान होकर अम्मीजान से कहा"भाइयों के सामने बहनों की ऐसी हरकतें रहने लगेंगी तो भाई क्या करेंगे? गुस्सा तो उसे करना ही है ना।" अम्मी जान ने भी गुस्से में कहा और उठकर कमरे से जाते-जाते कहने लगी"उस लड़की को एक पल का सुकून नहीं मिलता है, न हवेली में सुकून रहने दे सकती हैं, ये सुधर नहीं सकती है, क्या हो जाता अगर मान लेती वाजदान की बात। पहले हवेली की तरबियतें भूल गई, अब बड़े भाइयों ...Read More
DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 1 Scene 4.
SCENE 4."........ आपकी बेटी काफ़ी बदजुबान और बेकार है, इसे अपने गढ़ का हिस्सा हम कैसे बना लें?..............क्या मेरी आपके बेटे की हरकत से ज़्यादा बेबाक थी?.... ये बदगुमानी किसलिए है?................ ख़ामोश हो जाओ अब तुम, अम्हेल , बहुत तमाशा लगा लिया है तुमने..............तो क्या उसकी बदतमीज़ी हर हालत में सही थी?......"अम्हेल तन्हा अपने कमरे में बैठे उन लम्हों को सोच रही थी जिस पर उसकी अम्मी जान ने भी यक़ीन नहीं किया। मिबसाम और माहम ने कमरे में आकर देखा कि उसने अपनी चूड़ियां तोड़कर पूरे कमरे में बिखेरा हुआ है और ख़ुद से ख़ुद की कहानी सुन ...Read More