प्रस्तावना: तमस का साम्राज्य और अदृश्य आशाकलयुग का वातावरण: सन 4,28,126 ईस्वीसन 4,28,126 ईस्वी का यह भयानक काल-चक्र संपूर्ण ब्रह्मांड का सबसे खौफनाक, क्रूर और घिनौना दौर बन चुका था। मानवीय चेतना पूर्णतः भस्म हो चुकी थी और समूची सृष्टि पर कलयुग का एकछत्र, अजेय अधिकार स्थापित हो चुका था। वायुमंडल में शुद्ध वायु की जगह केवल छह महा-विकारों—काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर—की सड़ांध व्याप्त थी। कलयुगी अस्त्रों और घातक तकनीकों से निकले विषैले काले धुएं ने आकाश को पूरी तरह से निगल लिया था,
परम अंशः कलियुग का अंतिम महायुद्ध - प्रस्तावना
प्रस्तावना: तमस का साम्राज्य और अदृश्य आशाकलयुग का वातावरण: सन 4,28,126 ईस्वीसन 4,28,126 ईस्वी का यह भयानक काल-चक्र संपूर्ण का सबसे खौफनाक, क्रूर और घिनौना दौर बन चुका था। मानवीय चेतना पूर्णतः भस्म हो चुकी थी और समूची सृष्टि पर कलयुग का एकछत्र, अजेय अधिकार स्थापित हो चुका था। वायुमंडल में शुद्ध वायु की जगह केवल छह महा-विकारों—काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर—की सड़ांध व्याप्त थी। कलयुगी अस्त्रों और घातक तकनीकों से निकले विषैले काले धुएं ने आकाश को पूरी तरह से निगल लिया था, जिससे धरती ...Read More
परम अंशः कलियुग का अंतिम महायुद्ध - 1
सिम्भाला नगरी...वह कोई साधारण नगरी नहीं थी। संसार की आँखों से अदृश्य, दिव्य कवच से सुरक्षित और भगवान शिव पावन काशी से जुड़ी हुई यह नगरी कलियुग के उस भयानक समय में धर्म की अंतिम सुरक्षित शरणस्थली बन चुकी थी।समय के प्रलयंकारी प्रवाह में जब संसार का बहुत कुछ समाप्त हो गया, तब भी काशी का अस्तित्व बचा रहा। चिरंजीवियों, देवी-देवताओं और दिव्य शक्तियों ने मिलकर उसके चारों ओर एक ऐसा अदृश्य कवच बनाया था, जिसे कलियुग की सामान्य शक्तियाँ भेद नहीं सकती थीं। स्वयं विश्वकर्मा ने उस नगरी को एक अद्भुत दिव्य रूप प्रदान किया था।सिम्भाला में प्रकृति ...Read More
परम अंशः कलियुग का अंतिम महायुद्ध - 2
कलि ने केवल निर्जीव मशीनों और एआई (AI) पर ही भरोसा नहीं किया था। उसने द्वापर युग के दिव्यास्त्रों सुरक्षित रखने और अपनी असुरी सत्ता को अमर बनाने के लिए १०,००० परम-घातक, तंत्र-सिद्ध कलयुगी स्त्रियों का एक गुप्त दस्ता तैयार किया, जिसे 'कलि-माया सेना' कहा गया।ये १०,००० स्त्रियाँ कलयुग के सबसे घोर तामसिक स्थलों, श्मशानों और डार्क-वेब लैब्स के विकृत मेल से उत्पन्न हुई थीं। इन्हें प्राचीन मारण, मोहन, उच्चाटन और वशीकरण विद्याओं के साथ-साथ कलयुगी 'साइको-टेक्नोलॉजी' और 'बायो-हैकिंग' का कठोर प्रशिक्षण दिया गया था। ये क्षण भर में साधारण रूप धरकर कलयुगी समाज में घुल-मिल जाती थीं और ...Read More