उस रात जंगल ज़रूरत से ज्यादा खामोश था। इतना खामोश कि नील को सूखी पत्तियों पर पड़ते अपने ही जूतों की आवाज़ किसी हथौड़े की तरह सुनाई दे रही थी। हवा ठंडी थी, पर उसके माथे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। गाँव के बुज़ुर्ग हमेशा कहते थे—सूरज ढलने के बाद 'भैरव घाटी' के जंगल में कदम मत रखना। पर नील की मजबूरी थी। उसकी माँ की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी और शहर से दवा लेकर लौटने का यही एकमात्र छोटा रास्ता था।
हैवान - एपिसोड 1
उस रात जंगल ज़रूरत से ज्यादा खामोश था। इतना खामोश कि नील को सूखी पत्तियों पर पड़ते अपने ही की आवाज़ किसी हथौड़े की तरह सुनाई दे रही थी। हवा ठंडी थी, पर उसके माथे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं।गाँव के बुज़ुर्ग हमेशा कहते थे—सूरज ढलने के बाद 'भैरव घाटी' के जंगल में कदम मत रखना। पर नील की मजबूरी थी। उसकी माँ की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी और शहर से दवा लेकर लौटने का यही एकमात्र छोटा रास्ता था।वह पगडंडी से बस कुछ ही फासले पर था, जब अचानक हवा का रुख बदला। फिज़ा में ...Read More
हैवान - एपिसोड 1
कमरे के पुराने शीशे के सामने खड़े नील का जिस्म आग की भट्टी की तरह दहक रहा था। खिड़की छनकर आती पूरनमासी के चाँद की दुधिया रोशनी जैसे ही उसके बदन पर पड़ी, उसकी नसों में दौड़ता ज़हर खौल उठा।"अहहह... माँ!"नील के हलक से एक दर्दनाक चीख निकली, लेकिन अगले ही पल वह चीख किसी भारी, हिंसक गुर्राहट में बदल गई। उसकी रीढ़ की हड्डी चटकने लगी। हड्डियाँ टूटकर दोबारा जुड़ रही थीं, और उनका आकार दोगुना हो रहा था। उँगलियों के नाखून मांस चीरते हुए काले, नुकीले पंजों में तब्दील हो गए। उसके गोरे चेहरे और बदन पर ...Read More