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आरुणि की गुरुभक्ति
आरुणि की गुरुभक्तिअपने गुरु महर्षि धौम्य की आज्ञा पाकर शाम को छतरी और टॉर्च लेकर आरुणि अपने सर्वसुविधायुक्त गुरुकुल के ठीक पीछे स्थित खेतों की ओर निकल गया। वहाँ पहुँचकर उसने देखा कि खेत की मेड़ जगह-जगह से कटी हुई हैं। पानी द्रुत गति से खेतों से निकल कर आगे बहता जा रहा है। पानी के साथ हाल ही में रोपे गए पौधे भी बह रहे हैं। तेज गति से बारिश भी हो रही है और थमने के कोई आसार भी नहीं लग रहे। रात गहरी होती जा रही है। आरुणि धर्मसंकट में पड़ गया। वह पिछली बार की ...Read More