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अध्याय 9: आख़िरी सफ़रअस्पताल की खिड़की के बाहर बारिश हो रही थी।अंगद ICU के बाहर...
పంతులు గారి మాటలకు ఊర్మిళాదేవి " ఏం మాట్లాడుతున్నారు పంతులుగారు మళ్లీ ఒకసారి స...
अध्याय 5पिछले अध्याय में हमने देखा था कि उस आदमी ने डॉक्टर को बताया था कि वह परि...
પ્રકરણ ૬ : સેવન સિસ્ટર્સનો અંધકાર (Part 3)—નાગાલેન્ડના ગોડાઉનમાં મળેલું એ લાઈવ ડ...
अगली सुबहशक्ति ने फोन उठाया और अलिशा को कॉल किया।"अलिशा, मुझे उस नंबर की नई loca...
यह श्रद्धा कौन है आर्यमन जी?"आर्यमन के पास इस सवाल का जवाब तो था, पर ज़ुबान जैसे...
కోర్టు రూమ్ యొక్క ఆ ఐతిహాసిక మరియు విప్లవాత్మక తీర్పు తరువాత, పూర్తి హైదరాబాద్ న...
नास्ति मातृसमा छाया नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राणं नास्ति मातृसमा प्...
મિલાપના યુ.એસ. જવામાં માત્ર પંદર દિવસ બાકી હતા.માટે નક્કી થયું કે નેક્સ્ટ સન્ડે...
एपिसोड 25– आख़िरी राउंडऑडिटोरियम की सारी लाइटें हल्की हो गईं।सभी टीमों की नज़र अ...
It was seven o'clock in the morning. The city streets were slowly waking up, but Nisha Kumari's night had not ended yet. There was no sleep in her eyes, only exhaustion and...
આનંદનગર એ માત્ર ઈંટ-સિમેન્ટથી બનેલી ચાર દીવાલો કે ફ્લેટોનું સરનામું નથી, પણ “મિની ભારત”નું જ્વલંત ઉદાહરણ છે. અહીં હિન્દુ, મુસ્લિમ, જૈન, શીખ, પારસી અને ખ્રિસ્તી પરિવારો છે. ગુજરાતી,...
त्या दिवशी सकाळी १० वाजण्याच्या सुमारास सुशीलाने विनायकरावांच्या घराची बेल दाबली. चार वेळा बेल दाबल्यावर सुद्धा आतून काहीच उत्तर आलं नाही, हे बघून तिने घरं भोवती चक्कर मारली. कदाचि...
મુખ્ય પાત્રો : 1. અર્જુનસિંહ (વિક્રમસિંહનો જુનિયર / મુખ્ય ટ્રેકર): તીક્ષ્ણ બુદ્ધિ ધરાવતો વનરક્ષક જે માણસના મોં પરથી જૂઠ પકડી પાડે છે. ડાયલોગ:"જંગલ ક્યારેય વગર કારણે લોહી નથ...
एक अनजान मुलाकातशहर की भीड़ हमेशा की तरह अपने काम में व्यस्त थी।सड़कों पर गाड़ियों का शोर था। लोग जल्दी-जल्दी अपने ऑफिस जा रहे थे। कोई फोन पर बात कर रहा था, तो कोई अपने काम के लिए...
महायुद्धाची पहिली ठिणगी आणि 'व्हर्सायचा तह' २८ जून १९१९. फ्रान्सची राजधानी पॅरिसपासून काही अंतरावर असलेला 'व्हर्साय'चा (Versailles) भव्य राजवाडा आज एका ऐतिहासिक...
बहुत पुरानी बात नहीं है, यह उस दौर की कहानी है जब लोग आँखों से दिलों का हाल पढ़ लिया करते थे। शहर के बीचों-बीच बसा पुराना कॉलेज, जिसकी दीवारों पर इतिहास की परतें जमी थीं और गलियारो...
ये कहानी है चार लड़कियों की, जो अपनी-अपनी ज़िंदगी की परेशानियों से दूर भागकर आर्मी में आई थीं। लेकिन उन्हें कहाँ पता था कि आर्मी में आने के बाद उनकी ज़िंदगी पूरी तरह बदलने वाली है।...
भाग १ — एक दिन, कई जिम्मेदारियाँ सुबह छह बजे अलार्म बजा। मिहिर ने आँखें खोलीं, लेकिन कुछ क्षणों तक बिस्तर पर ही पड़ा रहा। बगल में उसकी पत्नी निशा अभी सो रही थी। सामने की द...
"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है...
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