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পর্ব ৯" এবার এখানে চেষ্টা করে দেখি," মন্তঝুলি বললেন।" করুন। আমাদের তিনজনকেই গাছ...
[दृश्य 1]स्थान: मुंबई के कॉलेज का मेन गेटसमय: सुबह के ठीक 8:00 बज रहे हैं।सड़कों...
1. गुरुदक्षिणा के बाद का पहला कदमकलियुग की ओर से अतीत के द्वार तकपिछले अध्याय मे...
હવે આ લગભગ રોજનું થઈ ગયુ હતુ. છેલ્લા બે મહિના થી સોનાલી જોતી કે તેના નાના કાકીજ...
અનિમેષ વિચારોમાં ગરકાવ હતો અને સતત માતાજીને બહેનના કોઈ સમાચાર મળે એવી પ્રાર્થના...
एक प्रेम कथा अशीही.... भाग 8 भाग 7 वरून पुढे " मग तुला तर ती दुसऱ्याच दिव...
मध्याह्न भोजन स्कूल निरीक्षण के लिए जिला शिक्षा अधिकारी महोदय एक ग्रामीण क्षेत्र...
પ્રકરણ ૨૨: નદી કાંઠે આદરાંજલિકાલિંદી અને હિરણ નદીના સંગમ પટ પર પરોઢની કાળી ચાંદર...
ક્રમશઃ — ભાગ ૨ માં... સિવિલ હોસ્પિટલનો ચોથો માળ, પથારીવશ ઠક્કરનો ઓરડો, અ...
अभी तक आपने पढ़ा कि राघव और कपिल द्वारा रूपा को समझाने की कोशिशें नाकाम रहती हैं...
গল্পটা চৌধুরী পরিবারের প্রায় দেড়শো বছরের পুরোনো জমিদারবাড়ির। গ্রামের মানুষরা জমিদার বাড়িটিকে বলতো—মৃত্যুমহল। বাড়িটার আসল নাম ছিল মৃণালিনী ভবন। কিন্তু গত চল্লিশ বছর ধরে কেউ...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
कलयुगी महा-उत्पाद और अधर्म की भयानक ज्वालाएँ भड़कने से ठीक १०० वर्ष पूर्व, जब काल-चक्र ने एक पावन युग की रचना का निर्णय लिया, तब पृथ्वी पर परम-पवित्र भूमि सिंभाला की स्थापना हुई। स...
"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है...
రాత్రి పదకొండైంది. బెంగళూరు నగరం వెలుపల ఉన్న ఆ పాత, పాడుబడిన సిమెంట్ ఫ్యాక్టరీ ప్రాంగణంలో శ్మశాన నిశ్శబ్దం ఆవరించింది. ఆకాశంలో నల్లటి మబ్బులు కమ్ముకుని, చంద్రుని వెలుతురును కూడా మస...
“जयसिंग तू जे काय म्हणतो आहेस त्याचा अर्थ तुला तरी कळतो आहे का? अशी भाषा करणं तुला शोभतं का?” प्रशांत चांगलाच संतापला होता. “मी काय चुकीचं बोललो? तू भयंकर स्वार्थी आहेस हे मला...
આનંદનગર એ માત્ર ઈંટ-સિમેન્ટથી બનેલી ચાર દીવાલો કે ફ્લેટોનું સરનામું નથી, પણ “મિની ભારત”નું જ્વલંત ઉદાહરણ છે. અહીં હિન્દુ, મુસ્લિમ, જૈન, શીખ, પારસી અને ખ્રિસ્તી પરિવારો છે. ગુજરાતી,...
आंध्र की उस तपती जमीन के नीचे, गोलकुंडा की खदानों में सन्नाटा सिर्फ फावड़ों की आवाज से टूटता था हजारों मजदूर पसीने से तर-बतर, जमीन के सीने को चीरकर कुछ ढूंढने की नाकाम कोशिश कर रहे...
அந்த அதிகாலை விடியும்போதே அத்தனை அழகாய் இருந்தது. மாற்றங்கள் நிரம்பிய அவள் வாழ்வில் எவ்வளவோ இனிமையான சம்பவங்கள் நினைவுக்கு வந்தன. ஹரிதாவுக்கு காப்பி என்றால் கொள்ளை இஷ்டம். அவள் அந...
रेल्वेच्या खिडकीतून तो बाहेरचा परिसर न्हाहाळत होता. रक्ताने माखलेल्या ग्लोव्हसवर त्याने एक कटाक्ष टाकला. मनात कितीतरी प्रश्न झिंज्या पसरून नाचत होते. विचारचक्रांच्या जाळ्यात तो घेर...
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