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वक्त बहुत कम था…पर शायद…प्यार अभी भी हार मानने को तैयार नहीं था…करण और कबीर ने ज...
એપિસોડ 29સોમવારની વહેલી સવારે મેનેજર કાકાની કડક સૂચના મુજબ જતીનને મેઇન બ્રાન્ચમા...
నీలి ఆకాశంకలలు, పోరాటం మరియు ఆశల కథఅధ్యాయం 1 — ఆకాశాన్ని చూస్తున్న అమ్మాయిఆశాపుర...
7 दिसम्बर 2019 को हमें जयपुर जाना था। फ्लाइट की टिकट, होटल की बुकिंग सब एक महीने...
एक छोटी-सी गलती से लेकर अपने पैरों पर खड़े होने तकअब ज्ञान के पास वह सब कुछ था,...
वेद्रान — एक इश्क़, एक श्रापअध्याय 14मीरा: यहाँ अँधेरा क्यों है, समीर?वेद्रान ने...
The Arabian Sea is located in the northwestern part of the Indian Ocean. It is e...
"हे काय आहे नक्की?"भुवयी आक्रसल्या गेल्या. तेवढ्यात त्यांची तंद्री मोडली गेली."ग...
भाग 11 वरून पुढे श्रुती आणी अभिमन्यू कॉलेजच्या कॅन्टीनमध्ये पोहचतात. कॅन्टीनमध्य...
జపాన్ దేశపు టోకియో నగరములోని నియాన్ ఘోస్ట్ ప్రయోగశాల అగ్ని కీలలలో కరిగి భస్మమవుత...
ऊना को चार्ली चैप्लिन होने का मतलब फ्रैंक हैरीज़, चार्ली चैप्लिन के समकालीन लेखक और पत्रकार ने अपनी किताब चार्ली चैप्लिन को भेजते उस पर निम्नलिखित पंक्तियां लिखी थीं: चार्ली...
మాది ఒక మధ్యతరగతి కుటుంబం నా పేరు (సూర్య) నేను చిన్నతనంలోనే ఒక అమ్మాయిని ఇష్టపడ్డాను. తాను వరుసకు నాకు మరదలు అవుతుంది . తనపేరు సత్య సత్య అంటే మా కుటుంబసభ్యులకు ఇష్టమే అందువల్ల నేన...
यादों के झरोखे से ====== मेरे जीवनसाथी की डायरी के कुछ पन्ने - मैट्रिक , प्री यूनिवर्सिटी और इंजीनियरिंग में एडमिशन और चीनी आक्रमण ====...
महान प्रकृतिविज्ञानी चार्ल्स रॉबर्ट डार्विन (12 फरवरी 1809- 19 अप्रैल 1882) को प्रजातियों के विकास की नयी अवधारणाओं के जनक के रूप में जाना जाता है। वे आधुनिक विज्ञान के भी जनक हैं।...
बाग़ के फल अब पकने लगे थे। लेकिन माली भी बूढ़ा होने लगा। माली तो अब भी मज़े में था, क्योंकि बूढ़ा होने की घटना कोई एक अकेले उसी के साथ नहीं घटी थी। जो उसके सामने पैदा हुए वो भी बूढ...
પડદા પાછળના 'કલાકાર' અજિત ડોવાલ: એક ઝલક જૂઠું બોલે છે, સ્વાંગ રચે છે,કાવાદાવા કરે છે , ષડયંત્રો ઘડે છે છતાં પણ સન્માનીય છે -કોણ ? બાળકોના ઉખાણાં જ...
मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (1) ज़िंदगी यूँ हुई बसर तनहा काफिला साथ और सफर तनहा जो घर फूँके आपनो कबीर मेरे जीवन में रचे बसे थे। खाली वक्त कभी रहा नहीं। रहा भी तो कबी...
નમસ્કાર મિત્રો આ વર્ષ ના પ્રથમ દિવસે જ મેં મારા બ્લોગ અને સોશ્યિલ મીડિયા દ્વારા જાહેરાત કરેલ કે આ વર્ષ થી હું દર રવિવારે એક નવી જ વાર્તા સાથે આવી રહ્યો છું. દર રવિવારે અલગ અલગ ઝોનર...
जीवन कशाप्रकारे जगावे आणि कशी जगू नये. ही एक अशी कला आहेत. ती सहजासहजी समजत नाही, म्हणून मी काही बाबी सांगण्याचा प्रयत्न करत आहे. माणूस हा प्राणी आज अशा रुपात दिसत आहे...
( एक )जबलपुर आते समय मन में ठंडक और बेचैनियों का एक मिला- जुला झुरमुट सा उमड़ रहा था जो मुंबई से ट्रेन में बैठते ही मंद- मंद हवा के झौंकों की तरह सहला भी रहा था और कसक भी रहा था।ईम...
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