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ऑफिस में रात के करीब आठ बज चुके थे।एक-एक करके कर्मचारी घर जा चुके थे।पूरी बिल्डि...
वक्त बहुत कम था…पर शायद…प्यार अभी भी हार मानने को तैयार नहीं था…करण और कबीर ने ज...
7 दिसम्बर 2019 को हमें जयपुर जाना था। फ्लाइट की टिकट, होटल की बुकिंग सब एक महीने...
एक छोटी-सी गलती से लेकर अपने पैरों पर खड़े होने तकअब ज्ञान के पास वह सब कुछ था,...
वेद्रान — एक इश्क़, एक श्रापअध्याय 14मीरा: यहाँ अँधेरा क्यों है, समीर?वेद्रान ने...
फ्रांस ,रात का वक्त एक बड़ी सी ऊंची इमारत पर आखिरी फ्लोर पर एक दिन भर का आदमी बै...
*हम सुधरेंगे – जग सुधरेगा* मंदिर में चल रहे सत्संग में स...
[ख़ुद से अनजान]कौन हैं हम,हमने जाना ही नहीं।क्यों हैं हम,हमने जाना ही नहीं।कहाँ...
Chapter 9: पंडित जी की लस्सी और दो नौसिखिए सीआईडीशाम के ठीक पांच बजे, पुराना शह...
कहानी - पीहू की नई उड़ानसमय बहुत तेजी से बदलता है। समय के गर्भ में क्या छुपा है,...
रामनाथ सिंह भिलाई स्टील प्लांट की सेवा से रिटायरमेंट ले चुके थे, रिटायरमेंट के बाद उन्हें बी.एस.पी से अच्छी खासी धन राशि मिली है .अपनी तीनों बेटियों की शादी उन्होंने अपने सेवाकाल म...
शाम के सात बजे थे। अक्टूबर की ठंडी हवा चल रही थी और आसमान एकदम साफ था। चाँद तारों के संग अठखेलियाँ कर रहा था।छत पर पड़ी चारपाई पर लेटी पीहू तारों को निहार रही थी। उसे तारों में अलग...
प्रस्तावना भारत एक ऐसा देश है जहाँ प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि 'माता' माना जाता है। जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और जंगलों के कटने सेपरेशान है, तब हमारे देश के...
एक छोटे से गाँव में जन्मा आरव नाम का लड़का गरीबी में पला-बढ़ा। घर में इतना पैसा भी नहीं था कि वह अच्छे कपड़े या किताबें खरीद सके। लेकिन उसकी आँखों में हमेशा बड़े सपने थे। बचपन म...
बात उन दिनों की है, एक मकान बना कर रहना, एक मिसाल और योग्यता थी। मकान अगर मंजिले हो, तो कया बात, बहुत अमीर समझे जाने वाला शक्श....." हाहाहा, "हसता हुँ, आपने पर.... ये दोगल...
रघुनाथ जी की हवेलीनुमा पुरानी हवेली की दीवारें अब सिर्फ ख़ामोशी की गवाही देती थीं। ढलती शाम के साथ जब गाँव की गलियों में चिड़ियों का शोर थमता, तब रघुनाथ जी के घर में पसरा सन्नाटा औ...
गंगा के किनारे बसा वह छोटा-सा गाँव सूर्योदय के साथ ही जाग जाता था। सुबह के पाँच बजे थे। आसमान अभी अँधेरा था, लेकिन पूरब की दिशा में हल्की लालिमा दिखाई देने लगी थी। दूर मंदिर...
समर्पित उन सभी स्त्रियों को जो किसी न किसी बंधन में जकड़ी हुई हैं। प्रस्तावना यह कहानी मेरा पहला सह-लेखन प्रयास है। मेरे और पृथ्वी गोहेल के विचारों को प्रस्तुत करने की एक...
संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि कबीर जी हमें डरा रहे हैं या जीवन से निराश कर रहे हैं कि “जब अंत में मिट्टी ही होना है, तो मेहनत क्यों करें?” ल...
विषय-सूची (Table of Contents)अध्याय 1: नानी का आँगन और ममता की छाँवअध्याय 2: नया मोड़, पढ़ाई और संस्कारों की नींवअध्याय 3: पहली मुलाकात और 'चार्ली चैपलिन' की मुस्कानअध्याय...
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