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ગાથા ૬ — આંતરિક શક્તિઆ ગાથાને આપણે આત્મબળના પ્રતીક તરીકે જોઈ શકીએ.બહારની પરિસ્થિ...
ગામના છેડે એક નાનું, જૂનું મકાન હતું. ચૂનાથી સફેદ કરેલી દીવાલો હવે પીળાશ પકડી ગઈ...
ભાગ ૯ : એક કલાકની મુદતકાર શહેરની રાત ચીરીને વડલીયા તરફ દોડી રહી હતી.સ્ટિયરિંગ પર...
2“పిన్నీ….” అంటూ గోల చేస్తూ పరిగెత్తుతూ వచ్చారు శృతి వాళ్ల అక్క సంజన పిల్లలు…“హే...
'भूलना' वरदान है या श्राप। एक सामान्य व्यक्ति दिन में कई बार इस समस्या क...
ব্যস্ত ঢাকা শহরের অন্তহীন জ্যাম পেরিয়ে গাড়িটা ধীরে ধীরে গতি নিতে শুরু করল—যেন...
भाग २ — छठी मैया की पहली परीक्षासूरज धीरे-धीरे ढलने लगा था।आसमान में लालिमा छा र...
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने एक न...
బంధం — ఒక ప్రేమ కథప్రేమ అంటే కేవలం ఇద్దరు మనుషులు ఒకరినొకరు ఇష్టపడటం మాత్రమే కాద...
पहला प्यार जिंदगी में कुछ एहसास ऐसे होते हैं, जिनके आने की कोई तारीख नहीं होती।व...
जिस गाँव का रास्ता रात में खत्म हो जाता था बिहार के एक छोटे-से जिले में एक गाँव था—भैरवपुर।नक्शे में उसका नाम था।सरकारी कागजों में उसका नाम था।वहाँ रहने वाले लोगों के राशन कार्ड, ज...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
മഴ പെയ്തുകൊണ്ടിരുന്ന ആ രാത്രി, കിഴക്കേടത്ത് മനയുടെ പഴയ ഇരുമ്പുവാതിൽ വർഷങ്ങൾക്കുശേഷം വീണ്ടും തുറന്നു. വാതിൽ തുറന്നപ്പോൾ ഉണ്ടായ കരകര ശബ്ദം വിജനമായ പറമ്പിലൂടെ ദൂരെയൊക്കെ പോയി മടങ്ങ...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले ................... शिवनगर में हुए खौफनाक हादसे के आखिरी दिन एक विचित्र घटना घटी। हुआ यूँ कि आखिरी दिन बाबा बटेश्वर की नज़र गेरुआ धोती में लिपटी...
भाग 1: देवपुर रियासत सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था। चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...
घना अंधेरा जंगल. रात का न जाने कौन- सा पहर था. चारों ओर ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ था कि अपनी ही साँसों की आवाज किसी अनजान खतरे की आहट लग रही थी. आसमान को काले बादलों ने निगल लिया था और...
सड़क के दोनों ओर फैले घने, हरे-भरे पेड़ और हल्की छनकर आती धूप... ऐसा लग रहा था मानो किसी टीवी सीरियल का कोई खूबसूरत दृश्य चल रहा हो। रास्ता एकदम सुनसान और शांत था। इसी खूबसूरत राह...
या गर्द काळोख्या भयाण रात्री निशांत एकटाच जिवाच्या आकांतान धावत होता. मागे असलेली अमानवी शक्ती आज त्याचा प्राण घेऊनच शांत होईल हे त्याला कळून चुकल होत. त्या काळ रात्री फक्त रातकिडे...
गर्मी के दिन थे।घास फूस लगभग खत्म हो चली थी और पशुओं को चराने के लिए ज्यादा जगह भी नहीं बची थी गर्मी बढ़ जाने की वजह से तेज धूप हो जाती थी और दोपहर के वक्त गायों को छांव में इकठ्ठा...
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