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वीकेंड चिट्ठियाँ By Divya Prakash Dubey

उन सभी लड़कियों के नाम जो पहले नहीं मिलीं!
ज़िंदगी से यूं भी तमाम शिकायतें हैं मुझे. लेकिन उन तमाम शिकवों में से एक ये भी है कि ज़िंदगी मुझे तुमसे पहले नहीं मिलवा सकती थी. हालांकि ऐ...

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श्यामचीं पत्रें By Sane Guruji

तूं मागें पुण्याच्या त्या सभेच्या वेळेस अकस्मात् मला भेटलास. सभा संपली होती. कांही तरुण विद्यार्थी माझ्याभोंवती जमले होते. त्यांतील बरेचजण केवळ स्वाक्षरीसाठीं उत्सुक होते. स्वाक्षर...

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